दुनिया इस समय खाद्य असुरक्षा के एक बड़े संकट से गुजर रही है। Global Hunger Index (GHI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में भूख को कम करने की दिशा में जो प्रगति हुई थी, वह अब लगभग रुक गई है। संयुक्त राष्ट्र का 2030 तक ‘शून्य भुखमरी’ (Zero Hunger) का लक्ष्य अब एक दूर का सपना नजर आता है।
Table of Contents
1. वैश्विक स्थिति: प्रगति की धीमी रफ्तार
2025 में दुनिया का Global Hunger Index स्कोर 18.3 है, जिसे ‘मध्यम’ (Moderate) श्रेणी में रखा गया है।
- रुकी हुई प्रगति: यह स्कोर 2016 के 19.0 स्कोर की तुलना में बहुत मामूली सुधार है।
- समय का अनुमान: रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि वर्तमान गति जारी रही, तो दुनिया को ‘निम्न’ भूख स्तर तक पहुँचने में 130 साल और लग सकते हैं।
2. भारत की स्थिति: ‘गंभीर’ श्रेणी में सुधार की चुनौती
भारत के लिए आंकड़े चिंताजनक बने हुए हैं, हालांकि कुछ सुधार देखा गया है:
- रैंकिंग (2025): 123 देशों की सूची में भारत 102वें स्थान पर है।
- रैंकिंग (2024): 127 देशों की सूची में भारत 105वें स्थान पर था।
- गंभीरता: 25.8 के स्कोर के साथ भारत को अभी भी ‘गंभीर’ (Serious) श्रेणी में रखा गया है।
- तुलना: दक्षिण एशिया में भारत का प्रदर्शन नेपाल (72वें), श्रीलंका (61वें) और बांग्लादेश (85वें) की तुलना में पीछे है।
3. भुखमरी के मुख्य संकेतक (भारत के संदर्भ में)
Global Hunger Index चार मुख्य आधारों पर मापा जाता है:
- अल्पपोषण (Undernourishment): भारत की लगभग 12.0% आबादी को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल पाती।
- चाइल्ड वेस्टिंग (Child Wasting): भारत में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में वेस्टिंग (कद के अनुपात में कम वजन) की दर 18.7% है, जो दुनिया में सबसे अधिक में से एक है।
- चाइल्ड स्टंटिंग (Child Stunting): लगभग 32.9% बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से कम कद के हैं (पुराना कुपोषण)।
- बाल मृत्यु दर (Child Mortality): कुपोषण के कारण 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 2.9% है।
4. संकट के तीन बड़े कारण (The Three C’s)
दुनिया भर में भुखमरी बढ़ने के पीछे तीन मुख्य कारक जिम्मेदार हैं:
- संघर्ष (Conflict): गाजा और सूडान जैसे क्षेत्रों में युद्ध के कारण अकाल की स्थिति पैदा हो गई है। सशस्त्र संघर्ष भोजन की आपूर्ति को पूरी तरह बाधित कर देता है।
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change): बाढ़, सूखा और बेमौसम बारिश फसलों को तबाह कर रही है, जिससे गरीबों के लिए भोजन जुटाना मुश्किल हो गया है।
- महंगाई (Cost of Living): आर्थिक अस्थिरता के कारण स्वस्थ आहार की लागत बढ़ गई है, जिससे दुनिया के अरबों लोग पौष्टिक भोजन नहीं खरीद पा रहे हैं।
5. समाधान की राह: लैंगिक न्याय (Gender Justice)
Global Hunger Index 2024-25 की रिपोर्ट का एक विशेष जोर ‘लैंगिक न्याय’ पर है। यह पाया गया है कि महिलाओं और लड़कियों को अक्सर सबसे कम और सबसे अंत में भोजन मिलता है। यदि महिलाओं को समान अधिकार और संसाधन दिए जाएं, तो पूरे समुदाय की पोषण स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है।
निष्कर्ष
Global Hunger Index केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की जिंदगी की हकीकत है। भारत जैसे देशों को अपनी आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ पोषण नीतियों और स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की आवश्यकता है।
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ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) क्या है?
GHI एक ऐसा उपकरण है जिसे वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भूख को व्यापक रूप से मापने और ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे हर साल ‘कंसर्न वर्ल्डवाइड’ और ‘वेल्थुंगरहिल्फ़’ द्वारा जारी किया जाता है।
GHI स्कोर की गणना किन 4 संकेतकों के आधार पर की जाती है?
यह सूचकांक चार प्रमुख पैमानों पर आधारित है:
अल्पपोषण (Undernourishment): अपर्याप्त कैलोरी प्राप्त करने वाली जनसंख्या।
चाइल्ड स्टंटिंग: उम्र के अनुसार कम लंबाई वाले 5 वर्ष से कम के बच्चे।
चाइल्ड वेस्टिंग: लंबाई के अनुसार कम वजन वाले 5 वर्ष से कम के बच्चे।
बाल मृत्यु दर: 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर।
GHI स्कोर की विभिन्न श्रेणियां क्या हैं?
स्कोर को 0 से 100 के पैमाने पर मापा जाता है (0 सबसे अच्छा और 100 सबसे खराब):
कम (Low): $\le 9.9$
मध्यम (Moderate): $10.0 – 19.9$
गंभीर (Serious): $20.0 – 34.9$
भयावह (Alarming): $35.0 – 49.9$
अत्यंत भयावह (Extremely Alarming): $\ge 50.0$
2024-25 में भारत की रैंक क्या है?
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत 123-127 देशों की सूची में 102वें से 105वें स्थान के बीच (वर्षवार डेटा के आधार पर) बना हुआ है। भारत को ‘गंभीर’ (Serious) श्रेणी में रखा गया है।
भारत में ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ की दर इतनी अधिक क्यों है?
भारत में चाइल्ड वेस्टिंग दर (18.7%) दुनिया में सबसे अधिक है। इसके प्रमुख कारण खराब स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल की कमी, माताओं में पोषण की कमी और जन्म के समय कम वजन हैं।
क्या GHI रिपोर्ट सरकारी डेटा का उपयोग करती है?
हाँ, GHI स्वयं डेटा एकत्र नहीं करता है। यह संयुक्त राष्ट्र (UN), यूनिसेफ (UNICEF), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व बैंक जैसे आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त डेटा का उपयोग करता है, जो अक्सर संबंधित देशों की सरकारों द्वारा ही प्रदान किया जाता है।
“जीरो हंगर” (Zero Hunger) लक्ष्य क्या है?
यह संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य 2 (SDG 2) है, जिसका उद्देश्य 2030 तक दुनिया से भूख के सभी रूपों को समाप्त करना है। हालांकि, वर्तमान प्रगति के अनुसार इस लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन लग रहा है।
संघर्ष (Conflict) भूख को कैसे प्रभावित करता है?
युद्ध और सशस्त्र संघर्ष भूख के सबसे बड़े चालक हैं। यह खाद्य प्रणालियों को नष्ट कर देते हैं, लोगों को उनके खेतों से विस्थापित करते हैं, और मानवीय सहायता (Food Aid) को पहुंचने से रोकते हैं।
क्या GHI और ‘भुखमरी’ एक ही चीज़ हैं?
नहीं, भुखमरी (Starvation) एक तीव्र स्थिति है, जबकि GHI ‘भूख’ के व्यापक पहलुओं को मापता है, जिसमें सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (छिपी हुई भूख) और दीर्घकालिक कुपोषण भी शामिल है।
व्यक्ति भूख कम करने में कैसे मदद कर सकते हैं?
भोजन की बर्बादी (Food Waste) को कम करके।
स्थानीय खाद्य बैंकों और एनजीओ (जैसे अक्षय पात्र, गिव इंडिया) को दान देकर।
सतत कृषि उत्पादों का समर्थन करके।
भूख और कुपोषण के मुद्दों पर जागरूकता फैलाकर।

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