QUAD की बैठक; India-America की तनातनी के बीच क्या रद्द होगी ?

QUAD की बैठक; India-America की तनातनी के बीच क्या रद्द होगी ?

नई दिल्ली:
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में बढ़ते कूटनीतिक तनाव ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इसी बीच सवाल उठ रहा है कि क्या इस तनाव का असर आने वाली क्वाड (Quad) बैठक पर पड़ेगा? क्वाड, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग का अहम मंच माना जाता है।

भारत-अमेरिका संबंध: एक संक्षिप्त इतिहास

भारत और अमेरिका के रिश्ते कई चरणों से गुजरे हैं:

  1. शीत युद्ध का दौर (1947–1991) – इस समय भारत गुटनिरपेक्ष नीति पर चलता था, जबकि अमेरिका का झुकाव पाकिस्तान की ओर था।
  2. पोस्ट-लिबरलाइज़ेशन (1991–2000) – भारत के आर्थिक सुधारों के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तेज हुए।
  3. रणनीतिक साझेदारी (2000–वर्तमान) – 2005 का सिविल न्यूक्लियर डील और बढ़ते रक्षा समझौते इस रिश्ते को नई ऊँचाई पर ले गए।

क्वाड (Quad) का महत्व

क्वाड की स्थापना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और मुक्त एवं खुला समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने के लिए हुई थी। इसमें रक्षा सहयोग, आर्थिक साझेदारी, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है।

भारत और अमेरिका के बीच हालिया मतभेद के पीछे कई कारण सामने आए हैं—

  • व्यापारिक विवाद: शुल्क और निर्यात-आयात नीतियों पर असहमति।
  • रक्षा समझौते: कुछ सैन्य खरीद और तकनीकी साझेदारी पर मतभेद।
  • कूटनीतिक रुख: वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग पक्ष लेना।

बैठक रद्द होने की संभावना कितनी?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि क्वाड (Quad) की बैठक सिर्फ भारत–अमेरिका रिश्तों पर निर्भर नहीं करती। यह बहुपक्षीय मंच है, जहां चारों देशों की सामूहिक रणनीतिक प्राथमिकताएं काम करती हैं।
➡️ संभावना: बैठक रद्द होने की संभावना बहुत कम है।
➡️ संशोधन: एजेंडा में बदलाव या वार्ता के स्वर में थोड़ी नरमी-गरमी आ सकती है।

QUAD क्या है और इसकी अहमियत

QUAD (Quadrilateral Security Dialogue) में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसका उद्देश्य Indo-Pacific Region में शांति, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

  • मुख्य लक्ष्य: समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, और सप्लाई चेन की मजबूती।
  • महत्व: चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाना।

कूटनीति की ताकत

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत और अमेरिका दोनों समझते हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए आपसी सहयोग जरूरी है। चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए यह बैठक एक अहम मंच है, जिसे रद्द करना चारों देशों के हित में नहीं होगा।

तनाव के कारण

  1. व्यापारिक नीतियों पर मतभेद – टैरिफ और आयात-निर्यात नीतियों में टकराव।
  2. रक्षा रणनीति में अंतर – इंडो-पैसिफिक में तैनाती और साझेदारी पर अलग दृष्टिकोण।
  3. मानवाधिकार व कूटनीतिक बयानबाज़ी – अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भिन्न रुख।
  4. विशेषज्ञों की राय
  5. सकारात्मक दृष्टिकोण: कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे और मतभेद सुलझा लेंगे।
  6. सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण: अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विवाद लंबा खिंचता है, तो बैठक को स्थगित करने की संभावना बढ़ जाएगी।

भारत की रणनीति

भारत का प्रयास होगा कि वह अमेरिका के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखते हुए, अपने स्वतंत्र विदेश नीति दृष्टिकोण को भी कायम रखे।

  • कूटनीतिक वार्ता – मतभेद वाले मुद्दों पर बंद-दरवाज़ा बातचीत।
  • बहुपक्षीय मंचों का उपयोग – G20, BRICS और ASEAN जैसे मंचों पर सकारात्मक संवाद।
  • रक्षा और तकनीकी सहयोग – विवादों से इतर इन क्षेत्रों में प्रगति बनाए रखना।

अमेरिका की रणनीति

अमेरिका की प्राथमिकता होगी कि भारत QUAD में सक्रिय और भरोसेमंद साझेदार बना रहे।

  • सुरक्षा सहयोग पर जोर – संयुक्त सैन्य अभ्यास और हथियार तकनीक साझा करना।
  • व्यापार विवाद सुलझाना – टैरिफ में कमी और निवेश बढ़ाना।
  • राजनीतिक बयानबाज़ी में संयम – संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी से टिप्पणी।

निष्कर्ष

वर्तमान हालात को देखते हुए, क्वाड (Quad) की बैठक समय पर आयोजित होने की पूरी संभावना है। हालांकि, भारत–अमेरिका के बीच बढ़ती दूरियां एजेंडा और चर्चाओं के स्वर को जरूर प्रभावित कर सकती हैं। यह बैठक इस बात की कसौटी होगी कि दोनों देश अपने मतभेदों को किनारे रखकर बड़े रणनीतिक लक्ष्यों के लिए एक साथ काम कर सकते हैं या नहीं।

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